छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारियों और विशेष रूप से लिपिक वर्ग के लिए बिलासपुर हाईकोर्ट से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है! हाईकोर्ट ने राज्य के सैकड़ों अनुकंपा नियुक्त लिपिकों को बहुत बड़ी राहत दी है।

साल 2013 के बाद नियुक्त कर्मचारियों के वेतन से की जा रही वसूली पर हाईकोर्ट ने पूरी तरह से रोक लगा दी है और पुरानी वेतनमान व्यवस्था को बहाल करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने 13 मई 2019 के उस विवादित वसूली आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया है, जिसके कारण कर्मचारी लंबे समय से मानसिक और आर्थिक तनाव झेल रहे थे।

फैसले में एक महत्वपूर्ण तकनीकी और कानूनी बिंदु पर मुहर लगाते हुए बिलासपुर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियुक्ति आदेश में प्रयुक्त शब्द ‘या’ (OR) का अर्थ ‘एवं’ (AND) नहीं हो सकता। कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा पूर्व में जारी ज्ञापन को मुख्य साक्ष्य मानते हुए कर्मचारियों के पक्ष में यह ऐतिहासिक निर्णय सुनाया।
इतना ही नहीं, हाईकोर्ट ने शासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि अनुकंपा नियुक्त लिपिकों को अगले 3 महीने के भीतर ग्रेड-2 के पद पर पदोन्नति प्रदान की जाए।
इस पूरे कानूनी संघर्ष और कर्मचारियों के हक की लड़ाई का नेतृत्व संघ के प्रांतीय अध्यक्ष रोहित तिवारी ने किया। संघ द्वारा दिए गए ज्ञापन और लगातार किए गए प्रयासों को हाईकोर्ट ने अपने फैसले का मुख्य आधार माना है। इस निर्णय के बाद प्रदेश भर के लिपिक वर्ग में खुशी की लहर दौड़ गई है और कर्मचारियों ने इसे संघ के संघर्ष की ऐतिहासिक जीत करार दिया है।

