बिलासपुर- विद्याडीह, 20 सितंबर 2026। सतनाम बाड़ा, विद्याडीह में 19 एवं 20 सितंबर 2026 को आयोजित दो दिवसीय अर्थबल ग्रंथ एवं सत्संग कार्यक्रम श्रद्धा, ज्ञान और सामाजिक जागरूकता के वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विद्याडीह सहित आसपास के अनेक गांवों तथा दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु एवं समाज के लोग बड़ी संख्या में पहुंचे और सत्संग एवं ग्रंथ का श्रवण किया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में शिक्षा, एकता, संस्कार, सकारात्मक सोच एवं सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देना रहा। सत्संग के माध्यम से लोगों को अच्छे विचारों को अपनाने, समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने तथा आने वाली पीढ़ी को बेहतर संस्कार देने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में श्री गेन्दलाल सतनामी, ग्राम चरनी टोला, लोरमी द्वारा अर्थबल ग्रंथ के विषय एवं विचारों पर प्रकाश डाला गया। ग्रंथ वाचन एवं सत्संग के माध्यम से जीवन में ज्ञान, सदाचार और सकारात्मक विचारों के महत्व पर चर्चा की गई।

“बच्चों को सामाजिक शिक्षा देने पर जोर”
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि बच्चों की शिक्षा केवल विद्यालय की पढ़ाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्हें समाज, संस्कार, मानवीय मूल्यों, बुजुर्गों के सम्मान, आपसी सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी की शिक्षा भी दी जानी चाहिए। बच्चों में बचपन से ही अच्छे विचार और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होने से आने वाली पीढ़ी अधिक जागरूक और जिम्मेदार बन सकती है।
“सत्संग से सकारात्मक वातावरण का निर्माण”
सत्संग के माध्यम से लोगों को आत्मचिंतन, अच्छे विचार और सकारात्मक जीवनशैली की ओर प्रेरित किया गया। सत्संग से परिवार और समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने, आपसी सहयोग बढ़ाने तथा बुरी आदतों से दूर रहने की प्रेरणा मिलने की बात कही गई।

“भोजन, खीर एवं प्रसाद वितरण”
आयोजन के दौरान दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं एवं उपस्थित लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। सामूहिक रूप से सभी ने भोजन ग्रहण किया। इसके साथ ही श्रद्धालुओं के लिए खीर एवं प्रसाद का वितरण भी किया गया। आयोजन में भोजन एवं प्रसाद व्यवस्था ने सामूहिक सहभागिता और आत्मीयता का वातावरण बनाया।
“आयोजन में इनका रहा विशेष सहयोग”
कार्यक्रम को सफल बनाने में दीप कुमार अंचल, बिहारी लाल कोसले, डॉक्टर जीवनलाल, जीवन लाल, सुंदरलाल चौवन, गेंदले, बृजलाल जांगड़े, लक्ष्मण जांगड़े, सौखी चेलके, दिलहरन गागिले, मालिकराम, भागी कुर्रे, खेमन पंडित, साधराम, राजेंद्र गेंदले, मनोज कुर्रे एवं शिवकुमार पाटले सहित अन्य लोगों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
महिलाओं की ओर से रामकली, रागनी, फगनी बाई, विश्वासा, दुखनी बाई एवं कुसुमलता जांगड़े ने भी आयोजन की व्यवस्थाओं एवं कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय सहभागिता निभाई।
“सतनाम बाड़ा – ज्ञान के अखाड़ा” का उद्देश्य
“सतनाम बाड़ा – ज्ञान के अखाड़ा” के माध्यम से शिक्षा, सामाजिक शिक्षा, संस्कार, सत्संग, साहित्य एवं सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। आयोजकों का उद्देश्य है कि समाज के बच्चे, युवा, महिलाएं, बुजुर्ग और सभी वर्ग ज्ञान एवं सकारात्मक विचारों से जुड़ें तथा समाज के विकास में अपनी भूमिका निभाएं।
आयोजन में सहयोग करने वाले सभी अतिथियों, ग्रंथकर्ता, श्रद्धालुओं, महिलाओं, युवाओं, बच्चों एवं आसपास के गांवों से पहुंचे लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
संचालक बसंत जांगड़े ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य समाज में एकता, शिक्षा, संस्कार और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना है। आने वाले समय में भी सतनाम बाड़ा के माध्यम से बच्चों, युवाओं, महिलाओं एवं समाज के सभी वर्गों को ज्ञान और सामाजिक शिक्षा से जोड़ने का प्रयास जारी रहेगा!

