बिलासपुर- न्यायधानी बिलासपुर के सिम्स अस्पताल से एक बार फिर इलाज में लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। एक 30 वर्षीय आदिवासी युवक, जो सड़क दुर्घटना के बाद सही-सलामत अस्पताल पहुँचा था, डॉक्टरों की कथित गलती के कारण जिंदगी की जंग हार गया यह हम नहीं बल्कि सर्व आदिवासी समाज ने सिम्स प्रबंधन व डॉक्टरों पर आरोप लगाया है,
इस घटना के बाद सर्व आदिवासी समाज में भारी आक्रोश है बुधवार को समाज के प्रतिनिधियों ने कलेक्ट्रेट पहुँचकर न्याय की मांग की है।

मामला ग्राम लछनपुर, पंचायत पेंडरवा (रतनपुर) के रहने वाले “महेश सिंह राज” का है। परिजनों के अनुसार, शनिवार, 2 मई 2026 की शाम करीब 6 से 7 बजे के बीच महेश एक सड़क दुर्घटना में घायल हुए थे। दुर्घटना के बाद उन्हें होशोहवास की स्थिति में बिलासपुर के सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उम्मीद थी कि इलाज के बाद वे घर लौटेंगे, लेकिन रविवार, 3 मई की दोपहर 3 बजे उनकी मृत्यु की खबर आई।
सर्व आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ का आरोप है कि यह सामान्य मृत्यु नहीं, बल्कि सिम्स प्रबंधन और वहां के डॉक्टरों की घोर लापरवाही और गलत इलाज का नतीजा है। इसी के विरोध में बुधवार को प्रदेश अध्यक्ष सुभाष सिंह परते और प्रदेश सचिव आयुष सिंह राज के नेतृत्व में समाज के दर्जनों पदाधिकारियों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में समाज ने निम्नलिखित मांगें प्रमुखता से उठाई हैं:- दोषी डॉक्टरों पर कड़ी कार्रवाई, घटना के लिए जिम्मेदार सिम्स प्रबंधन और डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई हो।
उचित मुआवजा:- पीड़ित शोकाकुल परिवार को हुई अपूरणीय क्षति के लिए तत्काल प्रशासनिक आर्थिक सहायता दी जाए।
आंदोलन की चेतावनी:- समाज ने स्पष्ट किया है कि यदि न्याय नहीं मिला, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होने कि बात कही।
ज्ञापन पर गौर करें तो कलेक्ट्रेट कार्यालय से भी इस पर त्वरित संज्ञान लेने के संकेत मिले हैं। दस्तावेजों पर अधिकारियों द्वारा Doctors की Team बनाकर जाँच कराने के निर्देश अंकित किए गए हैं।
इस दौरान संगठन के युवराज प्रधान (जिला अध्यक्ष), राजेंद्र सिंह पोर्ते, मनोज मरावी और बड़ी संख्या में युवा प्रभाग के कार्यकर्ता उपस्थित रहे। समाज का कहना है कि सिम्स में आए दिन हो रही ऐसी लापरवाहियों पर अब लगाम लगना जरूरी है।

कुछ ऐसे सवाल है जो हमें सोचने पर मजबूर करती है सिम्स अस्पताल का इतिहास रहा है चाहे सरकार भी पार्टी की हो यहां लोगों की जान जाना आम बात हो गई है आखिर क्यों नहीं रुकती सिम्स में मौतों का खेल, आखिर सरकार इसपर क्यों गंभीरता से काम नहीं कर रही है? क्या लोगों का जान जाना आम बात है? सरकार को इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है, और इस तरह के लापरवाही से इलाज करने वाले डॉक्टरों के ऊपर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की आवश्यकता है।

क्या सिम्स प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करेगा? क्या एक गरीब आदिवासी परिवार को न्याय मिल पाएगा? यह एक बड़ा सवाल है जो आदिवासी समाज ने समाचार के माध्यम से सरकार से की है।

