छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद ब्रिटिश नागरिक डॉ. कृष्ण कुमार की संदिग्ध मौत का मामला एक बार फिर गरमा गया है। लंबे समय से न्याय के लिए भटक रहा पीड़ित परिवार खुद रायपुर पहुंचा और पुलिस कमिश्नर IPS डॉ. संजीव शुक्ला से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर ने तत्काल जांच की कमान DCP दीपमाला कश्यप को सौंप दी है, जिसके बाद परिजनों के बयान दर्ज कर प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है।
इसके बाद जांच प्रक्रिया आगे बढ़ी और परिजनों के विस्तृत बयान दोबारा दर्ज किए गए। परिवार ने मेडिकल दस्तावेजों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पूर्व पुलिस जांच से जुड़े तथ्यों को सामने रखते हुए कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं।

परिजनों की सबसे बड़ी मांग है कि डॉ. कृष्ण कुमार को लगी गंभीर छाती की चोट की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाया जाए। पोस्टमार्टम विवरण में दाहिनी तरफ तीसरी से आठवीं तक छह पसलियों में फ्रैक्चर का उल्लेख है। आखिर इतनी गंभीर चोट कैसे लगी? बाथरूम के दरवाजे से टकराने की बताई गई घटना और मेडिकल रिकॉर्ड के बीच क्या संबंध है? अस्पताल में उपचार से लेकर रायपुर स्थित अशोका रतन सोसायटी के आवास पर उनकी देखभाल तक की परिस्थितियों की निष्पक्ष पड़ताल होनी चाहिए।परिवार की उम्मीद अब कमिश्नरेट की जांच पर टिकी है। उनकी मांग स्पष्ट है कि जांच केवल औपचारिकता न बने, बल्कि प्रत्येक मेडिकल दस्तावेज, संबंधित व्यक्ति के बयान और घटनाक्रम की हर कड़ी का सत्यापन हो। यदि किसी संज्ञेय अपराध के तथ्य सामने आते हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
लंबे इंतजार के बाद परिवार को उम्मीद है कि कमिश्नरेट व्यवस्था में उनकी आवाज सुनी जाएगी और डॉ. कृष्ण कुमार की मौत से जुड़े अनुत्तरित सवालों का जवाब मिल सकेगा।

