बिलासपुर। न्यू सर्किट हाउस बिलासपुर में राजा गुरु, धर्मगुरु बालदास साहेब जी के पावन सानिध्य में सतनामी समाज की एक दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में प्रदेश भर से आए राजमहंत, समाज के वरिष्ठजन और बड़ी संख्या में युवा साथी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान समाज से जुड़े कई गंभीर और जनहित के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें मुख्य रूप से नवीन विधानसभा भवन का नाम पुनः ‘ममतामयी मिनीमाता जी’ के नाम पर रखने, आरक्षण के अधिकार, सतनाम धर्म की आधिकारिक मान्यता, राजनीतिक भागीदारी और परम पूज्य गिरौधपुरी धाम के समग्र विकास जैसे विषयों पर सार्थक विचार-विमर्श हुआ।

“भूमि विवाद में संघर्ष की जीत पर जताया आभार”
बैठक में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के भूमि विवाद का मुद्दा छाया रहा। धर्मगुरु बालदास साहेब जी के सशक्त नेतृत्व में समाज द्वारा किए गए संघर्ष के बाद स्टैंडिंग कमेटी द्वारा अपना निर्णय वापस ले लिया गया। इसे समाज की एक ऐतिहासिक विजय बताते हुए उपस्थित जनसमूह ने धर्मगुरु बालदास साहेब जी के प्रति हृदय से आभार प्रकट किया।
“संगठित होकर लड़ने का आह्वान”
बैठक को संबोधित करते हुए धर्मगुरु बालदास साहेब जी ने कहा कि समाज के अधिकारों, स्वाभिमान और पहचान की रक्षा के लिए सभी को एकजुट होना होगा। उन्होंने युवाओं और समाज के प्रबुद्धजनों से आह्वान किया कि वे अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और संगठित होकर दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें।

प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज के बिलासपुर जिला अध्यक्ष डी. एल. डहरिया के संबोधन से हुई। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए संगठन की एकजुटता और इसके महत्व पर प्रकाश डाला। अल्प सूचना के बावजूद बड़ी संख्या में पहुँचे लोगों का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि समाज की समस्याओं और ज्वलंत विषयों पर आगे भी इसी तरह एकजुट होकर काम किया जाएगा।
“मैं जितेंद्र पाटले जी और राजमहंत डॉ. बसंत अंचल जी का आभारी हूँ कि उन्होंने समाज के विशेष मुद्दों और आगामी कार्ययोजनाओं पर विस्तार से बात रखी। आज के विषय को गुरुजी ने भी सहर्ष स्वीकार किया है।
बैठक के दौरान बिलासपुर में राजा गुरु धर्मगुरु गुरु बालदास साहेब जी का आगमन हुआ। इस अवसर पर राजमहंत डॉ. बसंत अंचल जी ने समाज को एकजुट होकर अपनी बात रखने का आह्वान किया। उन्होंने बाबा गुरु घासीदास जी के सत्य के मार्ग और संवैधानिक मूल्यों पर चलने की सीख दी।

हमें बाबा गुरु घासीदास जी के दिखाए सत्य के मार्ग पर चलते हुए और संविधान का पालन करते हुए ही आगे बढ़ना है। गुरु घासीदास विश्वविद्यालय की जमीन के मुद्दे पर जिस तरह गुरु जी के नेतृत्व में पूरे समाज ने एक स्वर में आवाज उठाई, उसी का नतीजा है कि आज हमें सकारात्मक परिणाम मिला है। इसके लिए मैं गुरु जी का हृदय से धन्यवाद करता हूँ।
इस अवसर पर राजमहंत डॉ.बसंत अंचल, राजमहंत दशेराम खांडे, एस. एल. निराला, एम पी कुर्रे, डी.एल. डहरिया प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज, जी.पी. भास्कर, रामेश्वर सुनहरे, चौथराम भारद्वाज, लक्ष्मी सिन्हा, एच. आर.मनहर, एस.आर. पूर्णा, कमल सिंह डहरिया, डॉ.एस.एल. निराला,दिनेश लहरे प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज युवा प्रकोष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष, सी.डी. लहरे, सी. डी. टंडन, लालचंद मोहले पूर्व एस डी ओ मस्तूरी, रत्नाकर पहाड़ी, के. डी. घृतेश, अशोक भार्गव, पी.डी.ओगरे, तिलकराम जोशी, गोपेश्वर महेश्वरी, महेंद्र भारद्वाज, आर.डी. चेलक, चंद्रशेखर नोरके, सत्येंद्र खुटे, जितेंद्र पाटले, बेदराम खांण्डे, डी.पी. टंडन, रामा बघेल (पार्षद), ध्रुव कोरी (पार्षद), जी.एल. जोशी, मुकेश जांगड़े, जितेंद्र कुर्रे, प्रो.जी.पी. रात्रे, देशलहरा, उषा भास्कर, मधुबाला टंडन (पार्षद), प्रतिमा चतुर्विदानी आदि उपस्थित रहे!

