बिलासपुर- छत्तीसगढ़ की राजनीति में कुछ चेहरे अपने पदों से नहीं, बल्कि अपने संस्कारों और कार्यशैली से पहचाने जाते हैं। ऐसे ही एक वरिष्ठ नेता और बिलासपुर के विधायक अमर अग्रवाल हाल ही में बिलासपुर प्रेस क्लब के पारंपरिक कार्यक्रम ‘हमर पहुना’ में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने अपने बचपन से लेकर मंत्री पद तक के सफर, प्रशासनिक चुनौतियों और बिलासपुर के विकास से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बात किया,

अमर अग्रवाल ने अपने राजनीतिक सफर का पूरा श्रेय अपने पिता स्व. लखीराम अग्रवाल को दिया। उन्होंने बताया कि पिता के साथ काम संभालते-संभालते राजनीति से उनका स्वाभाविक जुड़ाव हो गया। बचपन में ही उन्हें सुंदरलाल पटवा, कैलाश जोशी, कुशाभाऊ ठाकरे और राजमाता सिंधिया जैसी दिग्गज हस्तियों को करीब से देखने और समझने का मौका मिला, जिसने उनके राजनीतिक संस्कारों की नींव रखी।
डॉक्टर बनने का सपना और 1996 से मुख्य राजनीति में प्रवेश
22 सितंबर 1963 को खरसिया में जन्मे अमर अग्रवाल का शुरुआती सपना डॉक्टर बनने का था। उन्होंने बायलोजी की पढ़ाई भी की, लेकिन परिस्थितियों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन के बाद वे संगठन में सक्रिय हुए। वर्ष 1996 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष बनने के साथ ही उनके राजनीतिक करियर की औपचारिक शुरुआत हुई।

“’जो नहीं आता, उसे सीखना ही जुनून’ पहली फाइल से 100 फाइलों का सफर”
प्रशासनिक अनुभव साझा करते हुए अमर अग्रवाल ने बताया कि जब वे पहली बार मंत्री बने, तो उन्हें फाइलों की जटिल प्रक्रिया समझ नहीं आती थी। उन्होंने अधिकारियों पर निर्भर रहने के बजाय खुद रोज पढ़ना शुरू किया। नतीजतन, 2003 से 2018 के कार्यकाल के दौरान वे एक घंटे में 100 फाइलों तक का निपटारा करने में सक्षम हुए। उन्होंने कहा कि ध्वजारोहण के प्रोटोकॉल से लेकर प्रशासनिक बारिकियों तक, उन्होंने हर चीज़ सीखी और यही सीखने की आदत उनका जुनून बन गई।
स्वास्थ्य मॉडल और 108-102 संजीवनी एक्सप्रेस की शुरुआत
स्वास्थ्य मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए उन्होंने बताया कि विदेश (नार्वे) यात्रा के दौरान WHO के स्टडी मॉडल से उन्हें समझ आया कि केवल डॉक्टर बढ़ाना ही समाधान नहीं है। इसी सोच के तहत छत्तीसगढ़ में संजीवनी 108 और महतारी एक्सप्रेस 102 जैसी आपातकालीन सेवाएं शुरू की गईं, जिन्हें व्यापक सफलता मिली।
“अरपा नदी और बिलासपुर के भविष्य पर बेबाक राय”
शहर के मुद्दों पर बोलते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि बिलासपुर कि जीवनरेखा अरपा नदी के मूल स्वरूप के साथ छेड़छाड़ हुई है। पानी रोकने की चुनौती आज भी बनी हुई है, जिस पर उन्होंने लिखित विरोध भी दर्ज कराया था। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि शहर के लिए तैयार किए गए 30 साल के मास्टरप्लान का असर अगले 5 वर्षों में स्पष्ट दिखने लगेगा।
सादगी पसंद और विशुद्ध शाकाहारी अमर अग्रवाल ने पत्रकारों से बात करते हुए यह संदेश भी दिया कि समय का प्रबंधन और संकल्प व्यक्ति को खुद ही तय करना पड़ता है। पद तो मिलता-रहता है, लेकिन काम को सीखना और निभाना ही असली पहचान बनाता है।

