बिलासपुर/बिल्हा- बिलासपुर जिले के बिल्हा में 26 जुलाई दिन रविवार को प्रगतिशील छत्तीसगढ़ समाज ब्लॉक इकाई की प्रथम बैठक का सफल आयोजन किया गया। इस बैठक में वरिष्ठ एवं युवा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष उपस्थित रहे जिनकी अध्यक्षता में बैठक को आगे बढ़ाया गया, इस बैठक में जिला व ब्लॉक स्तर के कई वरिष्ठ पदाधिकारी एवं सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

बैठक का आरंभ गुरु वंदना से की गई, जिला स्तर से पहुंचे राजमहंतो, अतिथियों, ब्लॉक इकाई के पदाधिकारियों, और उपस्थित सदस्यों ने अपना-अपना परिचय दिया और एक-दूसरे से आत्मीय मुलाकात की।

इस बैठक के दौरान जिला संरक्षक, अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष एवं महिला उपाध्यक्ष द्वारा ओजस्वी उद्बोधन दिया गया। पदाधिकारियों ने समाज की प्रगति और उन्नति पर विस्तृत जानकारी साझा की। साथ ही बाबा गुरु घासीदास जी के विचारों व सिद्धांतों का पालन करते हुए, संगठन के निर्धारित 15 बिंदुओं का मुस्तैदी से पालन करने का आह्वान किया गया।

” बिलासपुर जिला संरक्षक कमल डहरिया” ने 15 बिंदुओं पर विस्तार पूर्वक चर्चा की और बैठक में उपस्थित सभी पदाधिकारीयों को समाज का इस संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आग्रह किया।
“जिला अध्यक्ष धरमलाल डहरिया” जी ने बैठक में उपस्थित समस्त लोगों को बताया कि कैसे प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज ने प्रदेश से जिला, जिला से ब्लॉक से अठगवां, अठगवां से गाँव, गाँव से जन-जन तक संगठन और उनके कार्यों को पहुँचाने का कार्य किया है, उदाहरण के तौर पर हमारे छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिला, बेमेतरा, बलौदा बाजार, रायपुर में अनेकों कार्य किया है अभी हाल ही में रायपुर में 60 लाख रुपए की लागत से जमीन की रजिस्ट्री करवाया गया है जो एक मिसाल है।
इसी तरह हम बिलासपुर जिले के प्रत्येक ब्लॉकों जैसे मस्तूरी, बिल्हा, तखतपुर, कोटा में प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज के कार्यों के बारे में लोगों को बताएंगे और अधिक से अधिक संख्या में इस संगठन में जुड़ने के लिए लोगों से निवेदन करेंगे जिससे प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज के बैनर तले समाज सुधार एवं समाज की विकास के लिए जो भी कार्य किए जाएंगे उसे न केवल हमारा बिलासपुर जिला ही तरक्की करेगा अपितु पूरे छत्तीसगढ़ और साथ में भारत देश तरक्की करेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि जिले में संगठन की मजबूती के लिए जो भी आवश्यक कदम उठाना पड़े उसको संविधान के नियम एवं संगठन के बायलॉज के तहत सभी को करना है।

जिला सचिव एल पी जोगी ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया उन्होंने कमान संभालते हुए शुरू से आखरी तक माइक संचालन किया।
जिला प्रवक्ता जीपी भास्कर ने अपना अनुभव साझा करते हुए वरिष्ठ एवं युवाओं को कहां की हमें सबसे ज्यादा शिक्षा की ओर ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि आज हमारे लोग शिक्षित तो हो रहे हैं लेकिन उन्हें सहीं गाइड लाइन की आवश्यकता है और मैं उच्च पदों में रहते हुए अपना अनुभव आप लोगों के समक्ष साझा कर रहा हूँ।

तो वहीं कई वरिष्ठ जनों ने 15 बिंदुओं पर विस्तार पूर्वक चर्चा की और जिसमें और आवश्यकता अनुसार बिंदुओं को जोड़ने का आग्रह किया जिससे समाज में सुधार आए और तेजी से सतनामी समाज विकास करे।

बिल्हा ब्लॉक वरिष्ठ प्रकोष्ठ अध्यक्ष राजकुमार पाटले ने कहा कि अगर हम अपने समाज का तीन मुख्य पहलुओं—सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक—पर विश्लेषण करें, तो एक साफ़ खाई दिखाई देती है।

(1.) सामाजिक स्तर एक तरफ शोषित वर्ग पूरी तरह असंगठित है और पुरानी कुरीतियों के जाल में उलझा हुआ है। वहीं दूसरी तरफ, शोषक वर्ग संगठित रहकर समाज पर अपना वर्चस्व बनाए रखता है। (2.) आर्थिक स्तर आर्थिक मोर्चे पर शोषित वर्ग के पास संसाधनों पर नियंत्रण का भारी अभाव है। उत्पादन, वितरण और उपभोग की पूरी प्रक्रिया में असामान्यता और विषमता है। इसके विपरीत, शोषक वर्ग पूरी अर्थव्यवस्था और संसाधनों पर अपना सीधा नियंत्रण रखता है। (3.) राजनीतिक स्तर राजनीति के मंच पर शोषित वर्ग आज भी भेदभाव, अवसरों की कमी, सहभागिता के अभाव और सत्ता में नगण्य भागीदारी की मार झेल रहा है। दूसरी ओर, शोषक वर्ग का राजनीतिक क्षेत्र में नियंत्रण, आधिपत्य और बोलबाला बना हुआ है।

“समाज में बढ़ती असमानता, भेदभाव और शोषण”
तो फिर इस चक्रव्यूह को तोड़ा कैसे जाए? इसका जवाब छुपा है सामाजिक संगठन’ और ‘सशक्तिकरण’ में।
बदलाव का रास्ता: सामाजिक संगठन और सशक्तिकरण
अगर शोषित वर्ग को एक गरिमाभ्यी समाज, आत्म-सम्मान, प्रतिष्ठा और गौरव के साथ जीना है, तो उनका संगठित होना बेहद जरूरी है। सामाजिक संगठन का सीधा मतलब है, सामाजिक सशक्तिकरण पाना।

राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में अपनी पहुँच और पकड़ मजबूत करना।
यह संगठन की प्रक्रिया किसी एक जगह सीमित नहीं रह सकती, इसे ढांचागत रूप से हर स्तर पर फैलाना होगा।

राज्य स्तर, जिला स्तर, ब्लॉक / तहसील स्तर, अठगंवा (स्थानीय ग्राम समूह) स्तर।
इस पूरी लड़ाई और सामाजिक चेतना में सिविल सोसाइटी की भूमिका और उनका योगदान सबसे निर्णायक है। सिविल सोसाइटी ही शोषित वर्ग को जागरूक करने, उन्हें संगठित करने और उनके अधिकारों की आवाज़ को राज्य से लेकर ब्लॉक स्तर तक पहुँचाने का काम करती है।

“जब तक समाज का अंतिम व्यक्ति संगठित होकर अपने अधिकारों और संसाधनों पर अपनी दावेदारी पेश नहीं करेगा, तब तक एक समतामूलक और गरिमापूर्ण समाज का सपना अधूरा रहेगा।

बैठक में युवा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक सोनी जी ने महत्वपूर्ण सुझाव रखते हुए कहा कि बैठकों में समय का महत्व को समझते हुए समय का सदुपयोग करना होगा संगठन और समाज के मुख्य मुद्दों पर ही सार्थक चर्चा होनी चाहिए। समय की पाबंदी का विशेष ध्यान रखते हुए समाज की ज्वलंत समस्याओं के निराकरण पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। इसके अलावा ‘लोग समाज के संगठन में आगे क्यों नहीं आ पा रहे हैं’ – इस विषय पर भी गहराई से चिंतन किया जाना चाहिए उनके इस सुझाव को उपस्थित सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया।

“उपस्थित सदस्यों के नाम”
कमल डहरिया जिला संरक्षक, धरमलाल डहरिया जिला अध्यक्ष, जी पी भास्कर जिला उपाध्यक्ष वरिष्ठ, उषा भाष्कर महिला प्रकोष्ठ जिला उपाध्यक्ष, लोकपाल सिंह जोगी जिला सचिव, राजकुमार पाटले बिल्हा ब्लॉक वरिष्ठ अध्यक्ष, दीपक कुमार सोनी बिल्हा ब्लॉक युवा अध्यक्ष, महेश कुमार सोनी कार्यकारी सदस्य, के डी बंदे संरक्षक, जितेन्द्र सोनी, दीपक कुमार महिलांगे, समीर लहरे, अजय सोनी, हरप्रसाद माण्डले, राकेश पाटले, उमेश रात्रे , भोंदू, सीडी कोसले राजमहंत, अमित पाटले जिला मिडिया प्रभारी, प्यारे लाल बंजारे, राधेलाल रात्रे, चंद्रभान सिंह कुर्रे, नारायण प्रसाद शाण्डे, विष्णु बेजारे, नरेश सोनी, जेठू प्रसाद घृतलहरे भरत लाल बघेल, डॉ सत्यवत जेन्डे, संतोष कुमार नौरंगे, पुशाऊ बघेल।

