बिलासपुर- छत्तीसगढ़ की माटी की वह महान बेटी, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन छुआछूत, बाल विवाह और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ युद्ध में समर्पित कर दिया—ममतामयी मिनीमाता जी की 110वीं जन्म जयंती कल मस्तुरी के सतनाम बाड़ा विद्याडीह (कुटेला) में बड़े ही गौरव और उत्साह के साथ मनाई गई।
बिलासपुर मस्तूरी के निकट विद्याडीह में माता सहोद्रा जनकल्याण समिति द्वारा आयोजित यह समारोह केवल एक जयंती उत्सव नहीं, बल्कि नारी शक्ति के हुंकार का प्रतीक बना। छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला सांसद और सामाजिक न्याय की प्रणेता मिनीमाता जी को याद करते हुए वक्ताओं ने उनके आदर्शों को आज के समय में प्रासंगिक बताया।

“मुख्य आकर्षण और संबोधन”
कार्यक्रम में सतनाम बाड़ा की संचालिका कुसुम लता जांगड़े जी ने मिनीमाता जी के जीवन के उन अनसुने पहलुओं को साझा किया, जिन्हें सुनकर उपस्थित जनसमूह में गौरव की लहर दौड़ गई। उन्होंने बताया कि कैसे असम में जन्मी ‘मीनाक्षी’ छत्तीसगढ़ की ‘मिनीमाता’ बनीं और महिलाओं के उत्थान का मार्ग प्रशस्त किया।
“बाबा साहेब की तस्वीर और संचालक का संबोधन”
समारोह में डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के उस अमर संदेश को दोहराया गया जिसमें उन्होंने कहा था कि— “किसी समाज की प्रगति महिलाओं की प्रगति से मापी जाती है।” सतनाम बाड़ा के संचालक गुरुजी बसंत जांगड़े ने अपने संबोधन में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी की सराहना की। उन्होंने एक कड़ा संकल्प दोहराते हुए कहा कि माता सहोद्रा जनकल्याण समिति का उद्देश्य केवल नाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धरातल पर बदलाव लाएगी। उन्होंने कुटेला ग्राम की उस महान परंपरा का भी जिक्र किया जहाँ माता सहोद्रा के सम्मान में महिलाओं द्वारा होलिका दहन न करने का प्रण आज भी कायम है।

“उपस्थिति और योगदान”
इस भव्य आयोजन में क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक और समाज सेवी उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से:
पुरुष वर्ग: जगजीवन घृतलहरे, दिलहरन गंगीले, बिहारी कोशले, डॉ. जीवन घृतलहरे, बंजारा जी, मालिकराम घृतलहरे, चंद्रिका घृतलहरे, सौखी लाल चलके, मनीराम सोनवानी और खेमन खूंटे जी।

महिला शक्ति: सम्मत बाई खूंटे, आगर बाई पाटले, रागनी कोसले, रामकली अंचल, रामोतीन जांगड़े, अंजली घृतलहरे, आशा सोनवानी, संगीता घृतलहरे और दुर्गा सिंह जी की उपस्थिति सराहनीय रही।
“बच्चों की प्रस्तुति और काव्य पाठ”
कार्यक्रम की जान रहे सतनाम बाड़ा के बच्चे, जिन्होंने मंच पर मिनीमाता जी की जीवनी, गुरु घासीदास जी की अमृत वाणी और मुक्तस वाणी का मंत्रमुग्ध कर देने वाला पाठ किया। इसमें मास्टर योगी मधुकर, विशाल, युवराज, यामिनी, प्राची, सोनम, भाग्यलक्ष्मी, भावना, समीर और यामिनी गांगीले का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा।

पूरे कार्यक्रम का सफल मंच संचालन और काव्य पाठ सुंदरलाल घृतलहरे जी द्वारा किया गया।

कार्यक्रम का समापन मिष्ठान, पूरी और खीर के वितरण के साथ हुआ, जहाँ सभी ने एक-दूसरे को जयंती की बधाई दी और अंधविश्वास मुक्त समाज बनाने का संकल्प लिया।
मिनीमाता जी का संदेश आज भी गूँज रहा है— “महिलाओं की उन्नति ही समाज की असली उन्नति है।

