बिलासपुर- चिकित्सा विज्ञान, शल्य चिकित्सा (सर्जरी) और रोगी देखभाल के क्षेत्र में हो रहे आधुनिक बदलावों को एक मंच पर लाने के लिए अपोलो हॉस्पिटल्स बिलासपुर द्वारा “अपोलो अपडेट 1.0” का सफल आयोजन किया गया। इस भव्य शैक्षणिक और क्लिनिकल अपडेट कार्यक्रम में शहर और कॉर्पोरेट क्षेत्र के 130 से अधिक जाने-माने चिकित्सकों ने हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम क्षेत्र के सबसे बड़े सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) आयोजनों में से एक बनकर उभरा है, जिसका उद्देश्य मरीजों की बेहतर देखभाल के लिए डॉक्टरों को नई तकनीकों से रूबरू कराना था।

“विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में हुआ ज्ञान का आदान-प्रदान”
यह पूरा वैज्ञानिक कार्यक्रम अपोलो हॉस्पिटल्स बिलासपुर के यूनिट हेड अभय के. गुप्ता के मार्गदर्शन एवं संरक्षण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बिलासपुर और छत्तीसगढ़ के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने हिस्सा लिया। इस दौरान आपातकालीन चिकित्सा में बेहोशी (Loss of Consciousness) का प्रबंधन, चेस्ट ट्रॉमा, ब्रेन SOL, और किडनी प्रत्यारोपण जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

“इन आधुनिक तकनीकों और विषयों पर रहा मुख्य फोकस”
सम्मेलन के अलग-अलग सत्रों में देश के दिग्गज डॉक्टरों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी की नई तकनीकें डॉ. अभिषेक कौशले ने IVUS, OCT और रोटाब्लेशन जैसी तकनीकों के बारे में बताया, जिससे दिल की धमनियों की सटीक जांच और जटिल ऑपरेशन सुरक्षित तरीके से किए जा सकते हैं।
कैंसर सर्जरी में ICG तकनीक डॉ. अमोल पाडेगांवकर ने बताया कि इंडोसाइनिन ग्रीन (ICG) तकनीक कैंसर सर्जरी और लिम्फ नोड मैपिंग में कैसे क्रांतिकारी साबित हो रही है, किडनी प्रत्यारोपण (Renal Transplant) डॉ. विनय कुमार ए.वी. ने बताया कि अंतिम चरण की किडनी विफलता (Kidney Failure) से जूझ रहे मरीजों के लिए प्रत्यारोपण ही सर्वोत्तम विकल्प है। उन्होंने दाता चयन और ऑपरेशन के बाद की देखभाल पर जरूरी टिप्स साझा किए।

मधुमेह (डायबिटीज) का नया दौर डॉ. सुनद एम. ने इंसुलिन से आगे बढ़कर GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट्स जैसी नई दवाओं पर प्रकाश डाला, जो सिर्फ शुगर कंट्रोल नहीं बल्कि दिल और किडनी की भी सुरक्षा करती हैं। वहीं, डॉ. कल्पना दास ने “डायबिटीज प्रबंधन 2026” के तहत सतत ग्लूकोज मॉनिटरिंग (CGM) और व्यक्तिगत उपचार की नई दिशाओं पर चर्चा की।
योग और आध्यात्मिकता: डॉ. अरिहंत जैन ने बताया कि तनाव नियंत्रण और सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य से डायबिटीज को कैसे बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है वैस्कुलर डिजीज डॉ. शिशिर जायसवाल ने वैरिकोज वेन्स और एओर्टिक एन्यूरिज्म जैसी नसों की गंभीर बीमारियों के आधुनिक इलाज की जानकारी दी।

“पैनल चर्चा और रोचक रेडियोलॉजी क्विज़”
दोपहर के सत्रों में जटिल मेडिकल मामलों पर गहन मंथन हुआ डॉ. समर्थ शर्मा के संचालन में “अल्कोहॉलिक हेपेटाइटिस एवं DILI ओवरलैप” पर और डॉ. लाजपत अग्रवाल के संचालन में जटिल गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल मामलों पर केस-आधारित चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि जटिल बीमारियों के इलाज के लिए ‘मल्टीडिसिप्लिनरी दृष्टिकोण’ (कई विभागों के डॉक्टरों का तालमेल) बेहद जरूरी है।
विशेष आकर्षण कार्यक्रम का समापन डॉ. पवन गुप्ता द्वारा आयोजित एक बेहद रोचक ‘रेडियोलॉजी क्विज़’ के साथ हुआ। इसमें डॉक्टरों ने बड़े उत्साह से भाग लिया और विजेताओं को आकर्षक पुरस्कार भी दिए गए।

इस सफल आयोजन पर अपोलो हॉस्पिटल्स बिलासपुर के प्रबंधन ने कहा कि वे स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए निरंतर चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देने और क्षेत्र में नवीनतम साक्ष्य-आधारित चिकित्सा पद्धतियों (Evidence-based medicine) को उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। सभी प्रतिभागी डॉक्टरों ने इस कार्यक्रम की गुणवत्ता और डॉक्टरों के बीच नेटवर्किंग के इस बेहतरीन प्रयास की जमकर सराहना की।

