बिलासपुर- छत्तीसगढ़ के पारंपरिक पर्वों की श्रृंखला में मंगलवार को वार्ड क्रमांक (46) गणेश नगर नयापारा में ईसर गौरा पूजा महोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। यह महोत्सव छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और सामाजिक समरसता का अद्भुत उदाहरण पेश करता है।

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी गणेश नगर नयापारा में ईसर गौरा पूजा महोत्सव का भव्य आयोजन ईसर गौरा पूजा उत्सव समिति के द्वारा किया गया यह पर्व गौरा, दाई (पार्वती) और ईसर (शिव) के विवाह व पूजन का प्रतीक है, जिसमें स्थानीय लोग 500 से ज्यादा कि संख्या में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

पूरे क्षेत्र में त्योहार का माहौल छाया रहा पारंपरिक वाद्य यंत्रों, विशेषकर मांदर की थाप पर, श्रद्धालु नाचते-गाते हुए दिखाई दिए।
छत्तीसगढ़ के इस महान पर्व पर सभी समाज के लोगों ने अपनी सहभागिता दिखाई और गौरा ,दाई का आशीर्वाद प्राप्त किया।
महोत्सव का मुख्य कार्यक्रम नयापारा गौरा चौरा से प्रारंभ हुआ, जहाँ विधिवत पूजा-अर्चना के बाद गौरा-ईसर की प्रतिमाओं को गाजे-बाजे के साथ विसर्जन के लिए ले जाया गया।
शोभायात्रा के बाद प्रतिमाओं का विसर्जन मरिमाई तालाब में स्नान विसर्जन कराया गया।
जगह-जगह भोग प्रसाद का वितरण किया गया, जिससे भक्ति और उल्लास का माहौल और भी बढ़ गया।
ईसर गौरा पूजा उत्सव समिति के सभी सदस्य इस सफल आयोजन के लिए सक्रिय रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की जानकारी समिति के अध्यक्ष, राजेंद्र सिंह पोर्ते जी ने उपलब्ध कराई।
इस दौरान पुलिस का भी भरपूर सहयोग रहा व लगातार पुलिस पेट्रोलिंग गाड़ी गस्त लगाते रहे।

कार्यक्रम में प्रगति मंच संघर्ष समिति के प्रमुख पदाधिकारी गण भी शामिल हुए, जिनमें मुख्य रूप से विष्णु सोरी, गुड्डा नेताम, मोतीलाल मंडावी जी, अनिल कश्यप जी, अंकित पाल, सोहन नेताम, बल्लू जांगड़े, अनिल बंजारे, बलदेव केसकर, अविनाश नेताम, अमित नेताम, सली नेताम, सुरेश पोर्ते, राजा मरावी, सालू मरावी, रामचंद्र नेताम, नंदू, सोनू यादव, गणेश ध्रुव और अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
ईसर गौरा पूजा महोत्सव ने एक बार फिर गणेश नगर नयापारा में आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक एकता को मजबूत किया।
यह महोत्सव न सिर्फ एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि छत्तीसगढ़ की आदिवासी और लोक परंपराओं को जीवंत रखने का एक सशक्त माध्यम भी है।

