बिलासपुर- क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) बिलासपुर में राजस्व हानि और टैक्स चोरी का बड़ा मामला उजागर हुआ है। शिकायतकर्ता अखिलेश पाठक ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वाहन स्वामी राजेंद्र सोनी ने अधिकारियों की मिलीभगत से शासन को लाखों रुपए का नुकसान पहुँचाने की साज़िश रची।

“मामला क्या है?”
मामला बस क्रमांक सीजी 04 ई 1903 से जुड़ा हुआ है। वर्ष 2024 में तत्कालीन कर अधिकारी आनंद रूप तिवारी ने वाहन की बैठक क्षमता 32+0 निर्धारित कर 2,59,900/- का बकाया कर लगाया था। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से उसी अधिकारी ने अपने ही आदेश को बदलकर 27 नवंबर 2024 को टैक्स को शून्य घोषित कर दिया। जबकि नियमों के अनुसार कर अधिकारी अपने ही आदेश पर पुनर्विचार नहीं कर सकता।
“वर्तमान आरटीओ के कार्यशैली पर सवाल”
वर्तमान आरटीओ ने 23 सितंबर 2025 को अखिलेश पाठक द्वारा की गई शिकायत के जवाब में पत्र जारी कर लिखा कि कर अधिकारी अपने आदेश को पुनः विचार नहीं कर सकता। मगर रिकॉर्ड में साफ़ है कि पूर्व अधिकारी ने नियमों की अवहेलना करते हुए टैक्स को शून्य किया। इससे यह प्रश्न उठता है कि क्या वर्तमान आरटीओ ने अभिलेखों का अवलोकन किए बिना ही पत्र जारी कर दिया?

“RTO से ही काम सिद्ध होने पर अदालत और अपील की प्रक्रिया का वापस लिया जाना”
कर निर्धारण आदेश के विरुद्ध अपील परिवहन आयुक्त के पास न करके राजेंद्र सोनी सीधे उच्च न्यायालय पहुँचे। उन्होंने अदालत से प्रतिमाह 1000/- अतिरिक्त टैक्स जमा करने की गुहार लगाई जिसमें ब्याज और शास्ति की राशि से छूट देने संबंधी आधार लिया गया। लेकिन जब अधिकारी ने टैक्स शून्य घोषित कर दिया तो सोनी ने चालाकी से अपनी याचिका वापस ले ली। यह घटना शासन के राजस्व को नुकसान पहुँचाने की साज़िश की ओर इशारा करती है।
अधिवक्ताओं की आपत्ति
बाद में सोनी द्वारा अपने वाहन पर आच्छादित अनुज्ञा पत्र को काफिर अली को विक्रय कर दिया गया जिसकी निर्धारित सुनवाई 23 सितंबर 2025 को प्रकरण क्रमांक 117 की ऑनलाइन सुनवाई में अधिवक्ता शिवेश सिंह और अंशुल रंजन श्रीवास्तव ने गंभीर आपत्तियाँ दर्ज कीं।
शिवेश सिंह ने प्रश्न उठाया कि जब सीजी 15 जेड ए 0723 वाहन की नस्ती कार्यालय में उपलब्ध नहीं है तो उसके टैक्स का लाभ वाहन स्वामी को कैसे दिया गया?
अंशुल रंजन श्रीवास्तव ने बताया कि राजेंद्र सोनी और उनकी पत्नी के नाम पर पंजीकृत वाहनों (सीजी 16 ए 1194 और सीजी 11 ए 6108) पर लाखों का टैक्स बकाया है।
“शासन को धोखे का आरोप”
शिकायत में कहा गया है कि राजेंद्र सोनी ने वाहन की बैठक क्षमता में गड़बड़ी कर परमिट में गलत जानकारी दी और शुरुआती तीन माह तक पूरा टैक्स जमा कर विभाग को भ्रमित किया। इसके बाद चौथे माह से टैक्स चोरी शुरू हो गई, जिससे लगभग 3 लाख का बकाया टैक्स हो चुका है।
“प्रमुख माँगें”
जिस पर शिकायत करता द्वारा राजेंद्र सोनी के विरुद्ध धोखाधड़ी का आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाने एवं त्रुटिपूर्ण “कोई बकाया नहीं प्रमाण पत्र” तत्काल निरस्त किया जाने की मांग की गई है ल
7 दिनों में कार्रवाई न होने पर ईडब्ल्यूओ (EWO) और एसीबी (ACB) जैसी एजेंसियों में शिकायत दर्ज कर उच्च स्तरीय जांच कराए जाने संबंधी मांग भी की जाने की तैयारी किया जा रहा है ।
इस प्रकरण से परिवहन विभाग जो कि समय-समय पर भ्रष्टाचार के आरोप में रहा है फिर से राज्य शासन की आर्थिक नुकसान संबंधी आरोप लगे हैं जिसकी गंभीरतापुर और जांच किया जाना आवश्यक है।

