बिलासपुर के मोपका-चिल्हाटी स्थित “GTB ग्रुप ऑफ कॉलेज” से। जहाँ आज “SSC GD” की परीक्षा देने पहुंचे परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
अव्यवस्था का आलम यह था कि परीक्षा केंद्र के बाहर न तो पीने के पानी की बूंद थी और न ही छात्र-छात्राओं व अभिभावकों के लिए वॉशरूम (टॉयलेट) की कोई व्यवस्था!

“राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से छात्रों व अभिभावकों की अपील”!

दरअसल, आज से ही भीषण गर्मी का ‘नौटप्पा’ शुरू हुआ है बिलासपुर में तापमान 45 डिग्री के आसपास झुलसा रहा है ऐसे में SSC GD की पहली पाली के छात्रों को सुबह 09 बजे ही परीक्षा केंद्र के भीतर एंट्री दे दी गई थी। नियम के मुताबिक, यह परीक्षा सुबह 11:00 बजे तक खत्म हो जानी चाहिए थी।

लेकिन… कथित तौर पर तकनीकी गड़बड़ी’ और ‘सर्वर डाउन’ का हवाला देकर, इन मासूम छात्रों को दोपहर के 3:30 बजे तक परीक्षा केंद्र के अंदर ही बैठाकर सरवर प्रॉब्लम का हवाला देते रहे, जिससे छात्रों का भविष्य दांव पर लगा रहा।

इस अव्यवस्था का असर सिर्फ पहली पाली पर नहीं पड़ा, जो छात्र दूसरी और तीसरी पाली (Shift) में परीक्षा देने पहुंचे थे, वो बाहर धूप में खड़े होकर सिर्फ अपनी बारी का इंतजार करते रहे।

छात्रों और परिजनों को डर सता रहा था कि क्या उनकी परीक्षा कैंसिल हो जाएगी? क्या उनकी महीनों की मेहनत इस खराब सिस्टम की भेंट चढ़ जाएगी?

नाराज अभिभावकों ने सीधे देश और राज्य के शीर्ष नेतृत्व से गुहार लगाई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो के जरिए, अभिभावकों ने देश की “राष्ट्रपति” महामहिम द्रौपदी मुर्मू, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ” और छत्तीसगढ़ के “मुख्यमंत्री” विष्णु देव साय से अपील की है कि इस पूरे मामले की जांच हो और दोषी अधिकारियों व सेंटर संचालकों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।

सवाल बड़ा है कि जब लाखों रुपए का बजट होता है, जब महीनों पहले परीक्षाओं की तारीखें तय होती हैं, तो ऐन वक्त पर यह ‘तकनीकी खराबी’ का बहाना क्यों?

और उससे भी बड़ा सवाल कि 45 डिग्री की इस जानलेवा गर्मी में, परीक्षा केंद्रों पर बुनियादी सुविधाएं क्यों गायब थीं? क्या युवाओं के भविष्य और उनकी जान से खिलवाड़ करने वाले इन दोषियों पर गाज गिरेगी? या हमेशा की तरह सिस्टम में बैठे लोग दिमक की तरह छात्रों के भविष्य को ओखला करते रहेंगे?

