बिलासपुर- 18 दिसंबर 2025 – छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मस्तूरी ब्लॉक में स्थित ग्राम विद्याडीह के सतनाम बाड़ा में बाबा गुरु घासीदास जी की 269वीं जयंती हर्ष उल्लास के साथ मनाई गई। यह गुरु पर्व न केवल आध्यात्मिक उत्सव का प्रतीक बना, बल्कि समाज सुधार की एक मजबूत पहल का रूप धारण कर लिया। सतनाम बाड़ा के समर्पित कार्यकर्ताओं ने इस वर्ष एक अनोखा निर्णय लिया कि गुरु घासीदास जी के सात पवित्र सिद्धांतों में से एक को केंद्र बिंदु बनाकर कार्यक्रम आयोजित किया जाए। चुना गया विषय – “नशा मुक्त मानव समाज” – ने पूरे आयोजन को एक सामाजिक क्रांति का स्वरूप प्रदान किया।

यह पहल गुरु जी के ‘मनखे-मनखे एक समान’ के दर्शन को जीवंत करने का प्रयास है, जो नशे की विभीषिका से ग्रस्त समाज को एक स्वस्थ, एकजुट और प्रगतिशील दिशा दिखाती है। कार्यक्रम में विभिन्न गांवों से उन वीर व्यक्तियों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जिन्होंने नशा मुक्ति अभियान में अग्रणी भूमिका निभाई और समाज के लिए जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किए। इन नायकों की कहानियां न केवल प्रेरणा बनीं, बल्कि उपस्थितजनों को संकल्प लेने के लिए बाध्य कर दिया।
वर्ष भर सतनाम बाड़ा के प्रचार-प्रसार और सामाजिक कल्याण में तन-मन-धन से योगदान देने वाले कार्यकर्ताओं को भी सम्मानित किया गया। इनमें सुंदरलाल, जगजीवन घृतलहरे, डॉक्टर जीवनलाल घृतलहरे, चौवन गेंदेले, बिहारी लाल कोसले, चंद्रिका घृतलहरे, मालिकराम घृतलहरे सहित अनेक समर्पित साधक शामिल थे। उनकी निष्ठा और सेवा भावना ने सभी को गहराई से प्रभावित किया।
उपस्थित प्रबुद्ध वक्ताओं ने नशे के घातक परिणामों पर गहन विमर्श किया और बताया कि कैसे नशा मुक्ति अपनाकर हम स्वयं को तथा समाज को गुरु घासीदास जी के विचारों के अनुरूप एक आदर्श मानव समाज का निर्माण कर सकते हैं। बच्चों ने भी अपनी जीवंत अनुभवों के माध्यम से नशे की हानियों का मार्मिक वर्णन किया, जो हृदयस्पर्शी साबित हुआ। इन चर्चाओं ने आयोजन को एक विचार-मंथन का मंच बना दिया, जहां हर प्रतिभागी ने नशा मुक्त जीवन का संकल्प लिया।
सतनाम बाड़ा के संचालक गुरुजी बसंत जांगड़े ने पूरे कार्यक्रम का कुशल निर्देशन किया। उन्होंने विनम्रता से समाजवासियों से अपील की कि नशा किसी भी रूप में हानिकारक है। गुरु घासीदास जी ने अपने सात सिद्धांतों में इसे स्पष्ट रूप से निषिद्ध किया है। हमें गहन चिंतन-मनन कर इस विषय को वर्ष भर अमल में लाना होगा, तभी हम बाबा की जयंती को सच्चे अर्थों में सार्थक बना सकेंगे। सतनाम बाड़ा की यह पहल एक दीर्घकालिक अभियान का प्रारंभ है, जो नशा मुक्त मानव समाज छत्तीसगढ़ तथा पूरे भारत देश के स्वप्न को साकार करेगी।
कार्यक्रम का समापन बाड़ा की संचालिका एवं शिक्षिका कुसुमलता जांगड़े तथा उनके सहयोगियों श्रीमती रागनी कौशलें द्वारा गुरु आरती कर सभी उपस्थितजन को प्रसादी भोजन , खीर पूड़ी वितरण से हुआ। विशेष सहयोग गुरुजी बसंत जांगड़े के पिताजी श्री बृजलाल जांगड़े जी सहित अन्य वृद्धजनों का रहा, जिनका मार्गदर्शन आयोजन की सफलता का आधार बना। सफल मंच संचालन चौवन गेंदेले ने किया, जिसने समारोह को और अधिक जीवंत बना दिया।
यह विषय-आधारित आयोजन न केवल एक उत्सव था, बल्कि समाज परिवर्तन का एक प्रेरक संदेश। सतनाम बाड़ा के कार्यकर्ताओं की यह साहसिक पहल पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल है, जो गुरु घासीदास जी के सिद्धांतों को आधुनिक चुनौतियों से जोड़ती है। आइए, हम सभी मिलकर नशा मुक्त मानव समाज का निर्माण करें – एक स्वस्थ, सुखी और समावेशी दुनिया के लिए!
जय सतनाम जय गुरु घासीदास!
संपर्क: सतनाम बाड़ा, ग्राम विद्याडीह, मस्तूरी ब्लॉक, बिलासपुर (छ.ग.)
संचालक: गुरुजी बसंत जांगड़े

