बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिजली उपभोक्ता एसोसिएशन (C.G.E.C.A.) जिला-बिलासपुर ने 16 अक्टूबर गुरुवार को राज्य सरकार की बिजली नीतियों के ख़िलाफ़ ज़ोरदार विरोध दर्ज कराते हुए मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर बिलासपुर को ज्ञापन सौंपा जिसमें एसोसिएशन ने राज्य में तुरंत ‘बिजली हाफ योजना’ को फिर से लागू करने और प्रीपेड स्मार्ट मीटर’ को बंद करने की माँग की है।

एसोसिएशन ने अपने ज्ञापन में कहा है कि बिजली एक बुनियादी सेवा है, लेकिन राज्य में बेरोज़गारी और महँगाई के बीच बिजली हाफ योजना बंद होने से 20 लाख से अधिक उपभोक्ताओं पर बिजली बिल का बोझ कई गुना बढ़ गया है। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ में सरप्लस बिजली उत्पादन के बावजूद आम जनता को महंगी दरों पर बिजली खरीदना पड़ रहा है। हाल ही में प्रति यूनिट 10 से 30 पैसे की बढ़ोतरी से महँगाई की दोहरी मार पड़ेगी।

प्रीपेड स्मार्ट मीटर पर ज़बरदस्त विरोध:
एसोसिएशन ने प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर कड़ा विरोध जताते हुए इसे अविलंब बंद करने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि बिलों में बेतहाशा वृद्धि: प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगने के बाद आम उपभोक्ताओं के बिजली बिल हज़ारों और लाखों में आ रहे हैं, जिससे जनता बेहद परेशान है।

कानून का हवाला: विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 55 का उल्लेख करते हुए एसोसिएशन ने कहा कि जब मौजूदा डिजिटल मीटर ख़पत मापने में पूरी तरह सक्षम हैं और उनमें कोई ख़राबी नहीं है, तो उन्हें हटाकर प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाना जायज़ नहीं है।
निजीकरण का आरोप: एसोसिएशन ने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर योजना और बिजली का निजीकरण चंद मुट्ठीभर पूँजीपतियों के मुनाफे के लिए किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे हज़ारों बिजली कर्मचारियों और दो लाख मीटर रीडरों को बेरोज़गार होना पड़ेगा।
उपभोक्ता सहमति अनिवार्य: ज्ञापन में कहा गया है कि बिजली कानून 2003 के अनुसार स्मार्ट मीटर लगवाना या न लगवाना उपभोक्ता की सहमति पर निर्भर करेगा, बावजूद इसके कंपनियाँ ज़बरदस्ती मीटर लगा रही हैं।
प्रमुख माँगें:
छत्तीसगढ़ बिजली उपभोक्ता एसोसिएशन ने आम जनता के हित में मुख्यमंत्री से सकारात्मक निर्णय लेने की आशा व्यक्त करते हुए निम्नलिखित माँगें रखी हैं:
छत्तीसगढ़ राज्य में ‘बिजली हाफ योजना’ पुनः अविलंब शुरू किया जाए।
प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाना तुरंत बंद किया जाए।
जहाँ स्मार्ट मीटर लग चुके हैं, वहाँ पुनः सरकारी डिजिटल मीटर लगाया जाए।
बिजली संशोधन विधेयक कानून 2022 अविलंब वापस लिया जाए।
बिजली का निजीकरण बंद किया जाए।
एसोसिएशन ने उम्मीद जताई है कि सरकार जल्द ही आम जनता के हित में इन माँगों पर विचार कर ठोस कदम उठाएगी।

