बिलासपुर। एनटीपीसी सीपत परियोजना से प्रभावित ग्रामीण और मजदूर अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। कौडिया, नवागांव और हरदा के लगभग 60 किसानों का जीवन एनटीपीसी प्रबंधन की अनदेखी और मनमानी के कारण संकट में आ गया है।

“किसानों का मुआवजा बंद, जमीनें दलदली”
ग्रामीणों ने बताया कि एनटीपीसी की राखड़ डंपिंग और पानी निकासी के कारण उनकी उपजाऊ जमीनें दलदली हो चुकी हैं।
वर्ष 2011 में तहसीलदार, पटवारी और एनटीपीसी प्रबंधन ने इन जमीनों को दलदली घोषित किया था और किसानों को सरकारी दर पर वार्षिक मुआवजा दिया जा रहा था।
लेकिन, वर्ष 2023 के बाद बिना किसी पूर्व सूचना या पंचनामा के यह मुआवजा अचानक बंद कर दिया गया। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है।
“राखड़ प्रदूषण से स्वास्थ्य संकट”
किसानों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राखड़ के उड़ने से पूरा क्षेत्र बुरी तरह प्रदूषित हो गया है, जिसके कारण ग्रामीणों में दमा और सांस की बीमारियाँ फैल रही हैं।
14 जुलाई 2025 को राखड़ में दबने से स्व. रामखिलावन महिलांगे की मौत हो गई थी, लेकिन उनके परिवार को आज तक कोई सहायता नहीं मिली है।
ग्रामीणों का कहना है कि एनटीपीसी प्रबंधन गरीबों के जीवन को पूरी तरह नजरअंदाज कर रहा है।
“मजदूरों का चौतरफा शोषण”
एनटीपीसी सीपत विवाद गहराया: मुआवजा बंद, मजदूरों का शोषण और राखड़ प्रदूषण से ग्रामीण बेहालपरियोजना में कार्यरत मजदूरों के शोषण की भी गंभीर शिकायतें सामने आई हैं:
वेतन रोका गया: यूनिट-2 में कार्यरत सिमर इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी तीन माह से मजदूरों का वेतन नहीं दे रही है। विरोध करने वाले मजदूरों को नौकरी से निकाल दिया गया है।
स्थानीय मजदूरों की उपेक्षा: यूनिट-3 में विष्णु प्रकाश पोंगलिया कंस्ट्रक्शन कंपनी स्थानीय मजदूरों के स्थान पर बाहरी मजदूरों को रख रही है और उन्हें 12 घंटे काम लेकर केवल 8 घंटे का भुगतान कर रही है।
न्यूनतम मजदूरी का उल्लंघन: डेम नंबर-2 में कार्यरत जेपी एसोसिएट्स मजदूरों को केवल ₹250 से ₹300 प्रतिदिन मजदूरी दे रही है, जबकि केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम मजदूरी ₹541 तय है।
सुविधाओं से वंचित: मजदूरों को ईपीएफ (EPF), ईएसआई (ESI) और सुरक्षा कार्ड जैसी मूलभूत सुविधाएँ भी नहीं दी जा रही हैं।
“मजदूर यूनियन अध्यक्ष की चेतावनी: मनमानी बंद नहीं हुई तो फिर आंदोलन”
मजदूर यूनियन अध्यक्ष मुकेश सिंह धुरी ने एनटीपीसी पर मनमानी और मजदूरों की जिंदगी से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया।
उन्होंने बताया कि किसानों और मजदूरों की समस्याओं को शासन के सामने उठाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि उन पर मस्तुरी थाना प्रभारी द्वारा झूठा मामला दर्ज किया गया।
धुरी ने दो टूक कहा, “एनटीपीसी मजदूरों के साथ अन्याय कर रहा है, मुआवजा देने की बजाए उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रहा है। यही कारण है कि हमें आंदोलन करना पड़ रहा है।”
कलेक्ट्रेट में हल्ला बोल प्रदर्शन
अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों और मजदूरों ने अध्यक्ष के नेतृत्व में जमकर नारेबाजी की और हल्ला बोल प्रदर्शन किया।
ग्रामीणों की मुख्य मांगें हैं:
2013 के भूमि अधिग्रहण कानून (LARR) के अनुसार सभी किसानों को मुआवजा दिया जाए।
मजदूरों को न्याय मिले और उनका शोषण बंद हो।
राखड़ प्रदूषण पर तत्काल रोक लगाई जाए।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे एक बार फिर सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। उनका कहना था, “हम अपनी हक की लड़ाई एनटीपीसी से लेकर रहेंगे, चाहे इसके लिए आखिरी सांस तक क्यों न लड़ना पड़े।

