बिलासपुर में रविवार को छत्तीसगढ़िया सर्व समाज महासंघ के द्वारा बिलासपुर जिले के पदाधिकारीयों का चुनाव इमली पारा स्थित यादव भवन में रखा गया था, जिसमें छत्तीसगढ़िया सर्व समाज के प्रदेश अध्यक्ष रमेश यदु के नेतृत्व में सर्व सहमति से दिनेश लहरे जी को बिलासपुर जिला से जिला अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया।

“नवनिर्वाचित पदाधिकारी”
1.दिनेश लहरे (अध्यक्ष),
2.मोहन श्रीवास, संजीव ध्रुव (उपाध्यक्ष),
3.टीकम सिंह, अर्जुन गंधर्व, राजेंद्र वर्मा, सुजीत यादव, हीराराम निर्मलकर (कार्यकारिणी),
4.डॉ.रघु साव महासचिव,
5.संतोष आदिले, मुकेश जांगड़े (सचिव),
6.राजकुमार बंजारे (कोषाध्यक्ष),
7.पवन मिरी, अमित पाटले को(मीडिया प्रभारी)बनाया गया।
इस दौरान रमेश यदु ने अपने उद्बोधन के दौरान बड़ा बयान दिया है उन्होंने कहा कि हम हिंदू नहीं हैं हमारे धर्म शास्त्रों में कहीं पर भी हिंदू शब्द का वर्णन नहीं है बल्कि हमारे धर्म शास्त्रों में सनातन शब्दों का उल्लेख है इससे या प्रतीत होता है कि हम हिंदू नहीं सनातनी हैं।
उन्होंने आगे कहा की छत्तीसगढ़ प्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री होने से हमें काफी उम्मीद था कि छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ियों के हक और अधिकार के लिए सरकार उनके साथ खड़ी रहेगी लेकिन आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बाद भी लगातार आदिवासी समाज के ऊपर अत्याचारों में बढ़ोतरी हो रही है।

जल जंगल जमीन सब काटे जा रहे हैं और जो कोई इसका विरोध करता है उसके ऊपर पुलिस, ईडी, सीबीआई का छापा पड़ जाता है और उन्हें जेल जाना पड़ता है।
यदु ने आगे कहा कि अधिकतर देखा जाता है कि जिस भी समाज से छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री बना है वह छत्तीसगढ़ियों का भला नहीं किया है बल्कि अपने पार्टी में बंधे होने का बात कह कर अपने पार्टी का ही हित में कार्य करता रहा है इसलिए छत्तीसगढ़िया सर्व समाज महासंघ ने हर जिले में पदाधिकारी नियुक्त किया है ताकि विधान सभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में हमारे छत्तीसगढ़िया सर्व समाज के तरफ से विधायक और सांसद के लिए एक-एक नाम दिया जाएगा और जब वह जीत कर आएगा तो छत्तीसगढ़ियों के हित के लिए कार्य करेगा।

नवनियुक्त जिला अध्यक्ष दिनेश लहरे ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मेरा सर्वप्रथम जातिविहीन समाज बनाने का कार्य रहेगा ताकि जिस तरह हमें जातियों में बाँटकर अलग-अलग कर दिया गया है उन्हें वापिस एक कर सके, हम अपने हक और अधिकार की लड़ाई लड़ते तो हैं लेकिन शासन प्रशासन इसे गंभीरता से नहीं लेती है और यदि हम ऐसा कर पाने में सफल रहे तो निश्चित ही हमें अपने हक और अधिकार के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और सरकार को हमारा बात मानना पड़ेगा।
“कार्यक्रम में उपस्थित सभी समाज के नाम”:-
कुर्मी समाज, तेली समाज, सतनामी समाज, यादव समाज, गोस्वामी समाज, आदिवासी समाज, पटेल समाज, धूरी समाज, गड़रिया समाज, रजक समाज, धोबी समाज, सोनार समाज, गंधर्व समाज, सूर्यवंशी समाज, सोनकर समाज से सैकड़ो की संख्या में समाज प्रमुखों एवं जनप्रतिनिधियों का उपस्थिती रही।

