बिलासपुर- छत्तीसगढ़ की सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक बड़ी और सराहनीय पहल सामने आई है। बिलासपुर जिले के मस्तूरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम रिसदा में संत शिरोमणि परम पूज्य बाबा गुरु घासीदास जी के दामाद एवं पूज्य सहोदरा माता जी के जीवनसाथी, परम श्रद्धेय बुद्धू दीवान जी के कब्र-स्थल पर ऐतिहासिक स्मृति शिलालेख की स्थापना की गई है।

यह ऐतिहासिक पहल सतनाम बाड़ा विद्याडीह द्वारा समाज के गणमान्य लोगों की मौजूदगी में 24 अक्टूबर 2026 को दोपहर 1 बजे संपन्न हुई!
किसी भी समाज की पहचान उसकी ऐतिहासिक परंपराओं और पूर्वजों के योगदान से होती है। इसी ऐतिहासिक महत्त्व को ध्यान में रखते हुए सतनाम बाड़ा विद्याडीह ने बुद्धू दीवान जी के स्मृति-स्थल पर शिलालेख स्थापित किया है, ताकि गुरु घासीदास बाबा जी के परिवार से जुड़ी स्मृतियों को सार्वजनिक रूप से अंकित कर सुरक्षित रखा जा सके।
इस शिलालेख का मुख्य उद्देश्य भावी पीढ़ियों को अपने इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और पूर्वजों के संघर्षों से परिचित कराना है। सतनाम बाड़ा विद्याडीह का मानना है कि यदि ऐतिहासिक धरोहरों का दस्तावेजीकरण और संरक्षण न किया जाए, तो समय के साथ इनसे जुड़ी प्रमाणिक जानकारियाँ लुप्त होने का खतरा बना रहता है।
(कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों और शिलालेख स्थापना के दृश्य)
इस अवसर पर समाज के अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम में डॉ. जीवनलाल घृतलहरे, भंडारी कुटेला, हरिचंद, दधी सागर दिव्य, सौखी लाल चेलके, खेलूं घृतलहरे, मनीराम सोनवानी, संतोष बंजारे, मालिकराम घृतलहरे, शिवकुमार पाटले, भगवानी घृतलहरे, गंगाराम चेलके, दिलहरन गंगीले, चौवन गेंदले, सुंदरलाल घृतलहरे, बिहारी लाल कोशले, रामकली अंचल, रागनी कोशले, कुसुमलता जांगड़े और सतनाम बाड़ा विद्याडीह के संचालक बसंत जांगड़े समेत बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
सतनाम बाड़ा विद्याडीह का यह प्रयास संदेश देता है कि अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजना केवल किसी संस्था का नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है। रिसदा में स्थापित यह शिलालेख आने वाली पीढ़ियों को उनकी जड़ों और इतिहास से जोड़े रखने में अहम भूमिका निभाएगा।

