बिलासपुर जिला के मस्तूरी विद्याडीह सतनाम बाड़ा का संचालक बसंत जांगड़े ने अपने लेख में लिखते हैं कि क्या गुरु बालकदास जी का जन्म”आठे कन्हैया के दिन “हुआ था ?
सतनामी समाज की परंपरा ,साहित्यकारों के लेखन और उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतों के अध्ययन से गुरु बालक दास जी के जन्म को लेकर महत्वपूर्ण तथ्य सामने आते हैं ।जन्म की तिथि “”भादो अंधियारी पाख आठे” अर्थात भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी यानी कृष्ण जन्माष्टमी से जुड़ी हुई है जबकि जन्म वर्ष को लेकर स्रोतों में मतभेद हैं!

1. सबसे पहले “आठे” का प्रश्न—लोक परंपरा और साहित्य में
इस विषय में उपलब्ध सतनामी साहित्य में “भादो अंधियारी पाख आठे” का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। लेखक दुर्गा प्रसाद पारकर ने लिखा है कि राजा गुरु बालकदास जी का जन्म गिरौदपुरी में 1795 में भादो अंधियारी पाख आठे (कृष्ण पक्ष अष्टमी) को हुआ।
उनके दूसरे लेख में भी गुरु बालकदास जयंती को “गुरु महाअष्टमी (आठे), भादो कृष्ण पक्ष अष्टमी” कहा गया है। इसलिए पंथी परंपरा में कहा गया है –
“सन्ना हो नन्ना मोर नन्ना हो ललना
जिन्हें दिन कान्हा जन्म लिए ललना
वही दिन बालक जन्म धरे ललना“
भादो के आठे” वाली परंपरा कोई नई बनाई हुई बात नहीं है। इसी कारण आठे के दिन जैतखाम में पालो चढ़ाने की परंपरा भी प्रचलित रही है

2. 1795 वाला मत
“1795 के बछर भादो के अँधियारी पाख आठे के दिन…”
यह पंक्ति लेखक अनिल भतपहरी छत्तीसगढ़ी साहित्यिक रचना राजागुरु बालकदास में मिलती है।
अर्थात 1795 + भादो कृष्ण अष्टमी का उल्लेख स्वतंत्र रूप से साहित्य में मिलता है।
लेकिन ध्यान रखें—यह स्रोत ऐतिहासिक सरकारी अभिलेख नहीं, बल्कि साहित्यिक/लोकपरंपरा आधारित सामग्री है। इसलिए इसे प्रमाण के रूप में इस्तेमाल करते समय “साहित्यिक परंपरा के अनुसार” कहना उचित होगा।
3. 1805 वाला मत(आधुनिक श्रोतों में प्रचलित)
दूसरी ओर वर्तमान में बहुत से आधुनिक स्रोत 18 अगस्त 1805 को गुरु बालकदास जी की जन्मतिथि बताते हैं।
एक शोध-पत्र Shikshan Sanshodhan: Journal of Arts, Humanities and Social Sciences (2022)में लिखा है कि गुरु बालकदास जी का जन्म कृष्ण जन्माष्टमी के दिन 18 अगस्त 1805 को हुआ था।
आधुनिक लेखक डॉ. किशन टंडन क्रांति भी 18 अगस्त 1805 ई. (भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी) लिखते हैं।
अन्य जीवनी स्रोत जैसे हिन्दीविकिपीडिया ,साहित्यिपीडिया भी 18 अगस्त 1805 को जन्मतिथि बताते हैं।
इससे एक बात बहुत महत्वपूर्ण निकलती है:
1805 वाला आधुनिक मत भी “आठे/कृष्ण जन्माष्टमी” को ही जन्म-दिवस मानता है।
4. 1801 वाला मत?
इंडोनेशियाई विकिपीडिया के संदर्भ में R. Kshirsagar की पुस्तक का हवाला देते हुए जन्म-वर्ष 1801 भी दिखाई देता है।
1801 के पक्ष में कोई और ऐसा मजबूत प्राथमिक स्रोत नहीं मिला, जिसे 1795 या 1805 के बराबर वजन दिया जा सके।
इसलिए मैं अभी 1801 को प्रमाणित जन्म-वर्ष नहीं मन जा सकता ।
5. सबसे महत्वपूर्ण बात — 18 अगस्त 1805 क्या सचमुच जन्माष्टमी थी?
यहाँ थोड़ा सावधानी से सोचना जरूरी है।
18 अगस्त 1805 को आधुनिक स्रोत जन्माष्टमी/कृष्ण पक्ष अष्टमी के साथ जोड़ते हैं। लेकिन किसी ऐतिहासिक जन्मतिथि को सिर्फ आधुनिक पंचांग गणना के आधार पर अंतिम प्रमाण मानना उचित नहीं है, जब तक उस तारीख का आधार बताने वाला पुराना मूल दस्तावेज उपलब्ध न हो। क्योंकि 18 अगस्त 1805 को कृष्ण जन्माष्टमी नहीं पड़ी थी।
1805 में कृष्ण जन्माष्टमी 17 अगस्त 1805 (शनिवार) को पड़ी थी। यह भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि थी।
अतः
“18 अगस्त 1805” = आधुनिक स्रोतों में प्रचलित तिथि
लेकिन
“भादो कृष्ण पक्ष अष्टमी/आठे” = सतनामी लोक-साहित्य और परंपरा में अधिक व्यापक रूप से दिखाई देने वाली तिथि।
6. अब सबसे बड़ा सवाल — क्या गुरु बालकदास जी का जन्म उसी दिन हुआ जिस दिन कृष्ण का जन्म हुआ?
सतनामी लोकपरंपरा में इसका उत्तर हाँ है।
इस विश्वास को व्यक्त करने वाली पंथी पंक्ति बहुत महत्वपूर्ण है:
“सन्ना हो नन्ना मोर नन्ना हो ललना
जिन्हें दिन कान्हा जन्म लिए ललना
वही दिन बालक जन्म धरे ललना“
इसका अर्थ है— जिस दिन कान्हा का जन्मदिन मना रहे थे , उसी दिन बालकदास का जन्म हुआ।
इसी कारण गुरु बालकदास जयंती को आठे/जन्माष्टमी से जोड़ा जाता है।
7. फिर 1795 और 1805 में कौन सही?
यही वह जगह है जहाँ मैं आपको ईमानदार ऐतिहासिक निष्कर्ष देना चाहता हूँ।
उपलब्ध सामग्री के आधार पर:
विषय
स्थिति
भादो कृष्ण पक्ष अष्टमी/आठे
मजबूत लोक-साहित्यिक परंपरा
कृष्ण जन्माष्टमी से संबंध
स्पष्ट सतनामी परंपरा
1795 जन्म-वर्ष
साहित्यिक/लोकपरंपरा में प्रमाण
1805 जन्म-वर्ष
आधुनिक जीवनी/शोध सामग्री में व्यापक
1801
इस खोज में मजबूत प्रमाण नहीं मिला
1795 या 1805 में अंतिम ऐतिहासिक सत्य
अभी निर्णायक प्राथमिक प्रमाण आवश्यक
इसलिए मैं आपको अब 1795 या 1805 में से किसी एक को 100% प्रमाणित बताकर भ्रमित नहीं करूँगा।
8. एक और गंभीर सवाल: Robert Vane Russell जैसे पुराने औपनिवेशिक श्रोत क्या कहते हैं?
यहाँ भी सावधानी जरूरी है।
Robert Vane Russell ने मध्य भारत की जातियों और समुदायों पर महत्वपूर्ण औपनिवेशिक नृवंशशास्त्रीय सामग्री लिखी थी। लेकिन ऐसा प्रत्यक्ष मूल उद्धरण नहीं मिला, जिसमें Russell ने गुरु बालकदास की जन्मतिथि 1795 या 1805 स्पष्ट रूप से लिखी हो।
इसलिए केवल नाम जोड़कर यह कहना कि “Russell ने 1805 लिखा है” सही नहीं होगा
“अंतिम निष्कर्ष”
“सतनामी लोकपरंपरा एवं उपलब्ध साहित्य के अनुसार राजा गुरु बालकदास जी का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी, अर्थात ‘भादो के आठे’, को हुआ माना जाता है। सतनामी पंथी परंपरा में इस जन्म को श्रीकृष्ण के जन्माष्टमी दिवस से जोड़ा गया है—‘जिहे दिन कान्हा जनम लिए ललना, उही दिन बालक जनम धरे ललना।’ गुरु बालकदास जी के ईसवी जन्म-वर्ष के संबंध में उपलब्ध स्रोतों में मतभेद है; कुछ साहित्यिक स्रोत 1795 ई. बताते हैं, जबकि आधुनिक जीवनी एवं शोध सामग्री में 1805 ई. का उल्लेख मिलता है। अतः श्रोतों के अनुसार बिना प्राथमिक ऐतिहासिक अभिलेख के किसी एक ईसवी वर्ष को निर्विवाद अंतिम सत्य कहना उचित नहीं होगा।”। यह शोध का विषय है।

